सोमवार, 11 अगस्त 2008

आओ किटियाएं

अब हम आपको क्या बताएं?? इधर कुछ दिनों से बहुत बोर हो रहे थे। अरे जिसको देखो, वही बिजी। बस हम हैं फुरसतिया, न काम न काज। इधर उधर बस ताकते रहते कि कोई मिले तो उसके साथ जरा बतियाएं। बहुत दिनों से पतिदेव से भी पंगा नहीं हुआ कि कुछ इंटरटेनमेंट ही हो जाता। किसी बहाने से हमें भी उनको और उनकी पिछली सात पुश्तों तक को कोसना.... ना ना अपने अमृत वचन कहने का मौका मिलता और हमारी बोरियत भी दूर होती। पर हाय!!! ऐसा हुआ नहीं....
तभी किसी देवदूत की तरह हमारी एक सहेली शशिकला का फ़ोन आया कि उसने कुछ और सहेलियों के साथ मिलकर किटीपार्टी शुरू की है और हमें भी शामिल करने का फ़ैसला किया है। उसकी पहली खेप कल उसके घर पर है तो कल मिलते हैं.... अरे अँधा क्या चाहे??? हमने उसको लाख लाख दुआएं दी। भला हो उस आत्मा का, जिसने हमारा ख्याल किया वरना आजकल कहाँ कोई किसी के बारे में सोचता है??
खैर उस दिन हम सुबह सुबह ही उठ गए। अजी उठे क्या? रात में खुशी के मारे नींद ही नहीं आई कमबख्त। पूरी रात आने वाले दिन के सपने बुनते रहे। सुबह हमने पतिदेव को बोल दिया कि आज अपने खाने का इंतज़ाम कर लें, हमारी 'मीटिंग' है हमारी सहेलियों के साथ। उनने कुछ कहने की कोशिश तो की थी पर हमने आंखों ही आंखों में उसे दबा दिया। अरे!! यह मर्द जात कब समझेगी कि हम औरतों की भी कोई पर्सनल लाइफ है भाई! अगर हफ्ते में एक दिन (कभी कभी दो या तीन दिन भी) खाना नहीं बनायेंगे तो कौन सा पहाड़ गिर जाएगा??पर नहीं बस हमेशा हम औरतों को परेशान करने के नए नए बहाने ढूंढ़तेरहते हैं। क्या हम बस खाना बनाने (कभी कभी ही सही!!) की मशीन हैं??
उंहू.....छोडो यार कहाँ अटक गए हम भी!! हाँ तो हम कह रहे थे कि सुबह सुबह हम लग गए अपने को सँवारने में!! पिछली बार बाज़ार से एक महंगा सा फेसपैक लेकर आए थे, उसका ही उदघाटन किया सबसे पहले। फिर हमने अपने मेकअप की स्ट्रेटेजी बनाई कि कैसे मेकअप किया जाए कि लगे ही नहीं कि कुछ लगाया भी है। अब आप यह मत समझना कि हम बहुत बन संवर के बाहर निकलते हैं। वह तो कभी कभी ही बस........
खैर सबसे बड़ी विडम्बना होती है मौके के हिसाब से कपडों का चयन। क्या पहनें कि अलग दिखें?? अलग यानी कि... आप समझते हैं न???
पहले हाथ साड़ी पर पड़ा। फिर सोचा कि बहनजी ना लगें कहीं? सूट से होते हुए, स्कर्ट के रास्ते जींस को चुना। आख़िर अपने को खुले विचारों का जो दिखाना था!! अब किसी अनजान को तो नहीं पता न कि आप कैसे हैं?? आपके कपडों से ही आपके व्यक्तित्व का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसा मैं नहीं कहती, कल एक पत्रिका में पढ़ा था। (उसी पत्रिका में जिसमें से हमने "अपने ससुराल से कैसे छुटकारा पायें" की कटिंग संभाल कर रख ली है)
खैर तैयार होने के बाद हम चल पड़े अपनी सहेली के घर। वहां जाकर हमने देखा कि और भी बहुत सारी महिलायें थीं। हमारी सहेली शशिकला ने हमारा परिचय सबसे कराया। हम बहुत खुश हुए चलो बहुत दिनों के बाद नए लोगों से मिल रहे हैं। सबसे दुआ सलाम हुआ। फिर पानी वानी पीने के बाद शशिकला ने नमकीन और चाय परोसा। नमकीन की सबने तारीफ़ की। और बहुत सारे नमकीन की रेसिपी की अदला-बदली भी हुई। हम बहुत खुश हुए कि कितनी अच्छी होती है किटी-पार्टी। कितनी अच्छी अच्छी बातें सीखने को मिलती हैं। फिर शुरू हुआ घर कि सजावट के तरीकों का दौर। हमने भरपूर दिलचस्पी दिखाने की कोशिश की। हालांकि हम कुछ कुछ बोर होने लगे थे। (जब यही सब बातें करनी थीं, तो मिलने की क्या जरूरत? यह सब तो किसी भी अच्छी पत्रिका में पढ़ लो ) और हम शौकीन हैं ऐसी पत्रिकाओं के जिनमें "पति को लाइन पर लाने के १० नुस्खे", "प्रेमी को फंसाए रखने के १५ तरीके", "सास-ननद का दिमाग कैसे करें दुरुस्त?" टाईप लेख पढने को मिलें जो हमारे व्यक्तित्व को सँवारे।
खैर हम सब्र किए रहे कि कभी न कभी तो बोरियत दूर होगी। अजी लानत है ऐसी महिला-मंडली पर जिसमें पति, पूर्व-प्रेमी, सास-ससुर ननद आदि का जिक्र ना आए। खैर हमने ही बीडा उठाने का निश्चय किया। एक औरत जो कि नई नई ब्याही थी, उसे बकरा बनाने की ठानी। बात कुछ इस तरह शुरू हुई:
हम: हेल्लो, न्यूली वेड? (हलाँकि हम जानते थे, फिर भी..... )
वह: एस, आई ऍम निकिता।
हम: ओह... कोंग्रेट्स निकिता....
निकिता: थेंक्स
अब हमने सोचा कि आगे कि बात हिन्दी में करेंगे.....
हम: तो क्या करते हैं आपके पति निकी?
निकी: (जो हमें अपने करीब महसूस करने लगी थी क्यूंकि हमने उसको जानबूझकर उसके मायके वाले नाम से पुकारा था। हमें पता नहीं था लेकिन रिस्क खेला था जो कारगर सिद्ध हुआ!) वो रेलवे में हैं।
हम: अरे वह तब तो आप खूब घूमती होगी !! हनी-मून कहाँ मनाया??
निकी: नहीं अभी तक तो ज्यादा कहीं नहीं जा पाये हैं।
हम: (आश्चर्य का ड्रामा करते हुए) क्यों????????????????
निकी: जी वो सासू माँ की तबियत ख़राब थी।
अब तो बाजी हमारे हाथ में आ गयी। हम समझ गए कि निकी की दुखी रग पर हाथ रख दिया है हमने। उस दिन किस्मत हमारे साथ थी। क्यूंकि इसके बाद कमान शशिकला की एक पक्की सहेली बिन्दु ने संभाल ली। उसने निकी को समझाया कि सास की बिमारी तो बस बहाना होगी। असल में यह प्लान सास या ननद का ही बनाया हुआ होगा। निकी ने बहुत समझाने की कोशिश की। उसकी सास ऐसी नहीं है। पर हम सब औरतों ने उसे आख़िर मना ही लिया की सासें सब ऐसी ही होती हैं। उनको ज्यादा ढील नहीं देनी चाहिए। पति की लगाम जाते ही अपने हाथ में कर लेनी चाहिए।
आख़िर अंत में हम सब औरतों की जीत हुई। (सत्य कभी नही हारता)
उस दिन कसम से, हमने कई दिनों से दबाया हुए गुस्सा (पति, ससुराल का) अपनी हमदर्दनियों के बीच निकाला। ऐसा ही हाल सभी का था। सभी बेचारी बेबस-लाचार औरतें ही थीं। सबने बताया कि कितनी मुश्किल होते हुए भी वोह हफ्ते में २ दिन खाना बनाती हैं? कितनी मुश्किल से लड़-झगड़ के महीने में सिर्फ़ २० दिन ही ब्यूटी-पार्लर जा पाती हैं? उनको खर्च का हवाला दिया जाता है जबकि ननद को हर राखी भाईदूज पर गिफ्ट !!!
सच्ची में ऐसी आनंद कि अनुभूति हुई जैसे कि कई दिनों के बदहाजमे के बाद खूब सारी उलटी करने पर होती है। हमारा तो दिन ही सफल हो गया। दोपहर से शाम तक पता ही नहीं चला समय कहाँ चला गया?? फिर जब घर जाने का वक्त आया, तो सबने निश्चय किया कि अगली किटी-पार्टी हमारे घर होगी। हम तो धन्य ही हो गए जब देवी समान सहेलियों ने मुझ जैसी नाचीज़ को इस काबिल समझा।
अब अगले महीने किटी-पार्टी हमारे घर है। जो महिलायें घर में बोर हो रहीं हों यानी कई दिनों से पति के साथ पट रही है, सास-ननद से कहा-सुनी नहीं हुई हो मतलब आपके जीवन में कोई एक्साइटमेंट नहीं रहा तो उनको हमारी तरफ़ से खुला न्योता है, हमारे घर आयें और किटियाएं।

12 टिप्‍पणियां:

BS Charan 'BEKAS' ने कहा…

aapke dono lekh padhe.......civic sense and aao kiyaaen.....aapne civic sense men likha hai...ki aap manjhi hui lekhika nahi hai.....ye likhna band kijiye .....aap jitni flow aur vishay se bhatke bagair likhti hain utna har kisi ke bas men nahi.......

अनुराग ने कहा…

ओह यानि की आप भी dangerous ज़ोन में दाखिल हो गई है....खैर कोई बात नही...आपने ये नही बताया की उस दिन आपके उन्होंने क्या खाया ?अगली किती पार्टी के इंतज़ार में बैठे है..........हम लोग

शहरोज़ ने कहा…

bas likhti raho ye zyndagiyaan hi hain jo gahe-bagahe hamen bhi zindagi jeene ka sahi-galat arth batlati rahti hain.

P. C. Rampuria ने कहा…

बहुत अच्छा हुवा ! आज समय रहते मैंने ये लेख
पढ़ लिया है और ताई बाहर गई है ! उसको तो
हरगिज नही पढ़ने दूँगा ! एक तो ताई ऎसी और
ऊपर से भतीजियाँ ऎसी यानी करेला और नीम चढ़ा :)
ताऊ को जीने दो भई ! हाथ जोड़े :) :) :)

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari ने कहा…

न न ना, हम इसमें टिपियांयेंगें नहीं ।

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा…

बहुतै ज़बरदस्त व्यंग्य लिखा है. बस ध्यान रहे, कहीं "नारी जागरण मंच", "सास उन्मूलन फ्रंट" या "अबला नारी सशक्तीकरण समिति" वालों ने न पढ़ लिया हो.

बेकस से सहमत हूँ - बहुत अच्छा लिखती हो.

अनूप शुक्ल ने कहा…

आपकी शानदार जीत की बधाई। सत्य सच में अजेय होता है।

http://hindini.com/fursatiya

ज़ाकिर हुसैन ने कहा…

वाह प्रज्ञा जी
सचमुच शानदार रही आपकी किटी पार्टी.
अगली पार्टी का इंतज़ार रहेगा.
शुभकामनाये

रंजना [रंजू भाटिया] ने कहा…

उफ्फ्फ यह किटी पार्टी और इसकी दास्तान :) पर मुझे यह कभी पसंद नही आई :)

डा. अमर कुमार ने कहा…

.

मैं तो भुक्त भोगी हूँ,
जले पर नमक छिड़ने को तुम ही रह गयी थीं !

Surabhi ने कहा…

didi mazaa aa gaya aapki kitti party ki kahaani sun kar ... main to hans hans ke lot pot ho gayi aub aapki agli kitti party ka to mujhe aapse bhi jyada intzaar rahega ... :D

Ram Tyagi ने कहा…

very genious writting....bahut maja aayaa padane mein

keep it up !!